दीप्तिमान अशोकभाई त्रिवेदी को महिला शक्ति की जीती जागती तस्वीर कहें, तो गलत नहीं होगा। वे गुजरात की इकलौती लाइसेंसधारी अस्त्र विक्रेता हैं और 1998 से राजकोट में लाइसेंस अस्त्र भंडार का संचालन कर रही हैं। उनके प्रभुकृपा ऑर्म्स एम्यूनिशन स्टोर में 60 से 65 रिवॉल्वर, पिस्तौल, कई तरह की राइफलें हैं।
दीप्तिमान बताती हैं भारतीय हथियार करीब एक लाख में आ जाता है जबकि विदेशी के लिए 25 लाख रुपए तक खर्च करने पड़ सकते हैं। शुरुआत कैसे हुई, इस बारे में पूछने पर दीप्तिमान बताती हैं कि राजकोट में रजवाड़ों के समय की इकलौती अस्त्र-शस्त्र की दुकान बंद हो गई थी।
तभी उन्हें विचार आया कि क्यों न सरकार से विधिवत इजाजत लेकर वे खुद इसमें हाथ आजमाएं। लाइसेंस मिल गया और उन्होंने यह काम शुरू कर दिया। उन्हें इस बात की खुशी है कि पिछले 22 सालों से वे इस दुकान का सफलतापूर्वक संचालन कर रही हैं। वे चाहती हैं पुरुषों का क्षेत्र माने जाने वाले इस काम में महिलाओं की संख्या बढ़े।
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