+10 344 123 64 77

Saturday, April 18, 2020

कोरोना सर्वाइवर के ब्लड में मौजूद एंटीबॉडीज दोबारा संक्रमण न होने की गारंटी नहीं : विश्व स्वास्थ्य संगठन

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आपातकाल अधिकारी माइक रायन का कहना है कि कोरोना सर्वाइवर के ब्लड में मौजूद एंटीबॉडीज नए कोरोनावायरस कासंक्रमण दोबारा होने से रोक सकतीं हैं या नहीं, अब तक इसका कोई प्रमाण नहीं मिला है। माइक के मुताबिक, अगर एंटीबॉडीज प्रभावी भी है तो भी ये बहुत अधिकलोगों में विकसित नहीं हुई हैं।

सरकारों को चेतावनी

डब्ल्यूएचओ के महामारी विशेषज्ञों ने उन सरकारों को चेतावनी भी दी है जो एंटीबॉडी टेस्ट की तैयारी कर रहे थे। विशेषज्ञों का कहना है एक बार कोरोनावायरस से संक्रमित हुआ इंसान दोबारा इसकी जद में नहीं आएगा, इसकी कोई प्रमाण नहीं है। ब्रिटिश सरकार ने कोरोना से जूझ चुके लोगों के ब्लड में एंटीबॉडीज का स्तरपता लगाने के लिए करीब 35 लाख सीरोलॉजिकल टेस्ट कराए हैं।

एंटीबॉडीज दोबारा संक्रमण न होने की गारंटी नहीं
अमेरिका की संक्रमण रोग विशेषज्ञ डॉ. मारिया वेन का कहना है कि कई ऐसे देश हैं जो सीरोलॉजिकल टेस्ट की सलाह दे रहे हैं लेकिन इससे इंसान में ऐसीइम्युनिटी नहीं है जो गांरटी दे सकते हैं कोरोना का संक्रमण दोबारा नहीं होगा। सीरोलॉजिकल टेस्ट सिर्फ शरीर में एंटीबॉडीज का स्तर बता सकता है इसका मतलबये नहीं है वह वायरस के संक्रमण से सुरक्षित है।

क्या होती हैं एंटीबॉडीज
ये प्रोटीन से बनीं खास तरह की इम्यून कोशिशकाएं होती हैं जिसे बी-लिम्फोसाइट कहते हैं। जब भी शरीर में कोई बाहरी चीज (फॉरेन बॉडीज) पहुंचती है तो ये अलर्टहो जाती हैं। बैक्टीरिया या वायरस द्वारा रिलीज किए गए विषैले पदार्थों को निष्क्रिय करने का काम यही एंटीबॉडीज करती हैं। इस तरह ये रोगाणुओं के असर कोबेअसर करती हैं। जैसे कोरोना से उबर चुके मरीजों में खास तरह की एंटीबॉडीज बन चुकी हैं जब इसे ब्लड से निकालकर दूसरे संक्रमित मरीज में इजेक्ट कियाजाएगा तो वह भी कोरोनावायरस को हरा सकेगा।

एंटीबॉडी के लिए इतना हल्ला क्यों
भारत समेत कई देशों में कोरोना सर्वाइवर की एंटीबॉडीज से दूसरे मरीज मरीजों को ठीक करने की तैयारी चल रही है। संक्रमण से मुक्त हो चुके मरीजों कीएंटीबॉडीज का इस्तेमाल प्लाज्मा थैरेपी में किया जाना है। इस थैरेपी की मदद से नए मरीजों की इम्युनिटी बढ़ाकर इलाज हो सकता है लेकिन डब्ल्यूएचओ केइस बयान के बाद यह थैरेपी कितना काम करेगी, इस पर सवाल उठ गया है।

एंटीबॉडी का इस्तेमाल होगा कैसे
ऐसे मरीज जो हाल ही में बीमारी से उबरे हैं उनके शरीर में मौजूद इम्यून सिस्टम ऐसे एंटीबॉडीज बनाता है जो ताउम्र रहते हैं। ये एंटीबॉडीज ब्लड प्लाज्मा में मौजूदरहते हैं। इसे दवा में तब्दील करने के लिए ब्लड से प्लाज्मा को अलग किया जाता है और बाद में इनसे एंटीबॉडीज निकाली जाती हैं। ये एंटीबॉडीज नए मरीज केशरीर में इंजेक्ट की जाती हैं इसे प्लाज्मा डेराइव्ड थैरेपी कहते हैं। यह मरीज के शरीर को तब तक रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है जब तक उसका शरीर खुद येतैयार करने के लायक न बन जाए।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
WHO Coronavirus | Coronavirus World Health Organization (WHO) Latest News On COVID Immunity


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/34IJADh
via IFTTT

0 comments:

Post a Comment