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Friday, July 9, 2021

कहानी:वो बेटी को नाज़ों से रखते थे, उसकी हर ज़िद मानी जाती थी लेकिन आज बिना किसी ज़िद के ही हर बात मानी जा रही थी

बेटी की हर ज़िद पूरी की थी उसने। दस साल की थी, तब गोद में उठाने को मचलती थी। ढंग से तैयार हुए बिना कहीं जाने को राज़ी नहीं होती थी। आज उसके ज़िद किए बग़ैर ही हर बात मानी थी उसने।

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