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Sunday, November 24, 2019

तापसी पन्नू (Taapsee Pannu) ने अपनी फिल्मों और जबरदस्त एक्टिंग से लोगों के दिलों में...

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अयोध्या के नगर आयुक्त डॉ. नीरज शुक्ला ने बताया था कि "रामनगरी अयोध्या में...

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पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन शाकाहारी डाइट लेते हैं और खुलकर इस बात को भी स्वीकार करते हैं कि वो हफ्ते में एक बार सैल्मन ( एक प्रकार की मछली) भी अपनी वेगन डाइट में शामिल करते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि शाकाहारी डाइट में मछली का क्या काम?

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वारसा. माता-पिता की जिंदगी खुशियों से भर देने के साथ बेटियां पिता की जिंदगी के कुछ और साल भी बढ़ा देती हैं। पोलैंड की जेगीलोनियन यूनिवर्सिटी के अध्ययन में दावा किया है कि बेटियों के पिताउन लोगों के मुकाबले लंबी उम्र जीते हैं, जिनके यहां बेटियां नहीं होती। अध्ययन में पता चला कि बेटा होने का तो पुरुष की सेहत या उम्र पर कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन बेटी होने परपिता की उम्र 74 हफ्ते बढ़ जाती है। पिता के यहां जितनी ज्यादा लड़कियां होती हैं, वे उतनी लंबी उम्र जीते हैं।

यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने बच्चों का पिता की सेहत और उम्र पर असर जानने के लिए 4310 लोंगों का डेटा लिया। इसमें 2147 माताएं और 2163 पिता थे। शोधकर्ताओं का दावा है, यह अपनी तरह का पहला ऐसा शोध हैं। इससे पहले बच्चों के पैदा होने पर मां की सेहत और उम्र को लेकर अध्ययन हुए हैं।

बेटा-बेटी का मां की सेहत पर नकारात्मक असर
यूनिवर्सिटी के एक शोधकर्ता के मुताबिक, बेटियों की बजाय बेटों को प्राथमिकता देने वाले पिता अपनी जिंदगी के कुछ साल खुद ही कम कर लेते हैं। बेटी का पैदा होना पिता के लिए तो अच्छी खबर है, लेकिन मां के लिए नहीं। ऐसा इसलिए क्योंकि इससे पहले हुए अमेरिकन जर्नल ऑफ ह्यूमन बायोलॉजी के एक अध्ययन में कहा गया था कि बेटे और बेटी दोनों का मां की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ता है जिससे उनकी उम्र कम होती है।

पहले हुए शोध में ऐसे भी दावे
इससे पहले हुए एक अन्य अध्ययन में अविवाहित महिलाओं के शादीशुदा के मुकाबले ज्यादा खुश रहने की बात सामने आई थी। हालांकि एक और शोध में यह बात भी सामने आई थी कि बच्चे होने के बाद मां और बाप दोनों की उम्र बढ़ जाती है। इस अध्ययन में 14 साल तक का डेटा लिया गया था और पता चला था कि बच्चों के साथ रहने वाले कपल्स बिना बच्चों वाले कपल्स के मुकाबले ज्यादा खुश और लंबी उम्र जीते हैं।

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Fathers of daughters live longer, 74 years of age increases after every daughter is born


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मदुरै (मनीषा भल्ला).मदुरै से 125 किमी दूर रामेश्वरम के रास्ते में गांव है- कलईयुर। तमिल में कलई के मायने हैं ‘कला’ और युर यानी ‘गांव’। अपने नाम को सार्थक करता रामनाथपुरम् जिले का यह गांव पाक कला के लिए दुनियाभर में मशहूर है। गांव का हर पुरुष एक्सपर्ट कुक है।

दो हजार की आबादी वाले गांव के 300 से अधिक कुक देश ही नहीं दुनियाभर के बड़े होटलों और रेस्त्रां में काम कर रहे हैं। बाकी पुरुष शादियों-पार्टियों में लाेगों को अपने भोजन का मुरीद बना रहे हैं। इनकी आय 40 हजार से शुरू होकर लाखों रु. तक जाती है। गांव के सबसे बुजुर्ग कुक 73 वर्षीय मुरुवेल बताते हैं कि इस काम को पहचान 500 साल पहले मिलना शुरू हुई थी।

इस कला ने मछलियां पकड़ने वाले हमारे वानियार समाज को ऊंची जाति के लोगों की रसाेई में जगह दिलवाई है। सबसे पहले संपन्न वर्ग रेडियार ने हमें कुक रखना शुरू किया था। तब से पीढ़ी-दर-पीढ़ी गांव में हर बच्चा यह काम सीख रहा है। बुजुर्गों की देखरेख में 12 साल की उम्र में ट्रेनिंग शुरू हो जाती है, जो 10 साल तक चलती है।

24 घंटे में 617 डिश बनाकर गिनीज बुक में अपना नाम दर्ज करा चुके सेलिब्रिटी शेफ डॉ. दामू बताते हैं कि कलईयुर के शेफ सी फूड और अपने सीक्रेट मसालों के लिए मशहूर हैं। इनके जैसा करुवर टुकु (सूखी मछली) और चनाकुन्नी (मछली-चावल), प्याज और हरी मिर्च की चटनी दुनिया में कोई नहीं बना सकता। खाना बनाने में ये किसी यंत्र का उपयोग नहीं करते। हर काम हाथ से। वीआईपी और फिल्म एक्टर, फिर भले वो रजनीकांत हो या कमल हसन, कलईयुर के शेफ के हाथों का बना खाना जरूर चखना चाहता है।

यहां के शेफ ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, सिंगापुर, लंदन, और दुबई तक के रेस्त्रां में नौकरियां कर रहे हैं। अगर आप कलईयुर के शेफ हैं तो अच्छे वेतन पर नौकरी मिलना तय है। हिस्ट्री चैनल भी गांव के बारे में शो कर चुका है। खाने के शौकीन, ऑफबीट ट्रैवलर और रेसिपी पर शोध करने वालों का इस गांव में आना-जाना लगा रहता है।

गांव के हर युवा के पास रोजगार, साक्षरता में भी आगे

एआईएडीएमके नेता और पूर्व मंत्री अनवर राजा बताते हैं कि 55 देशों में 2.5 करोड़ तमिल रहते हैं और जहां तमिल हैं, वहां पर कलईयुर के शेफ भी हैं। इस हुनर के ही कारण कलईयुर गांव में हायर सेकंडरी तक स्कूल है। साक्षरता में गांव जिले में दूसरे नंबर पर है। गांव के हर युवा के पास रोजगार है।



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आसपास के गांवों में कलईयुर सबसे स्वच्छ है। प्रवेश द्वार पर देवताआें की मूर्तियां लगी हैं।


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हैदराबाद. हैदराबाद की 8 साल की पीडीवी सहरुदा ने शनिवार को दो वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बनाए। सहरुदा के इस कारनामे को एलीट वर्ल्ड रिकॉर्ड्स एलएलसी यूएसए ने मान्यता दी है। सहरुदा ने 20 मिनट में ही 102 ऑरिगेमी मॉडल बनाए और इतने ही समय में 350 सिरेमिक टाइल्स तोड़ीं। इससे पहले यह रिकॉर्ड नॉर्थ कोरिया की एक महिला खिलाड़ी के नाम था जिसने 20 मिनट में 262 टाइल्स तोड़ी थीं।

सहरुदा के मुताबिक, मैं तीन विश्व रिकॉर्ड बनाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन दो ही बना पाई। मैंने कई राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़े। पिछले एक साल से कराटे सीख रही हूं और अब तक ग्रीन बेल्ट ले चुकी हूं। सिरेमिक टाइल वाले इवेंट के लिए मैं अपनी ट्रेनर के साथ 5 मिलीमीटर मोटी टाइल तोड़ने की प्रैक्टिस कर रही थी।

लड़कियों और महिलाओं को ट्रेंड करना मकसद
सहरुदा की ट्रेनर अश्विनी आनंद ने बताया, मैंने 2017 के डब्ल्यूकेयू वर्ल्ड चैंपियन में सेकंड डिग्री ब्लैक बेल्ट हासिल किया है। मेरा मकसद ज्यादा से ज्यादा लड़कियों और महिलाओं को ट्रेंड करना है। सहरुदा की अभी शुरुआत है। सहरुदा विश्व चैंपियनशिप और दूसरी प्रतियोगिताओं के लिए तैयारी कर रही है। आशा है, आने वाले समय में सेल्फ डिफेंस हर बच्चे के लिए महत्वपूर्ण हो जाएगा।

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8 year old girl made two world records, broke 350 tiles in 20 minutes


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बीजिंग. चीन में गुइझोई प्रांत के यिंगशान शहर में बनी 99.9 मीटर ऊंची लकड़ी की इमारत को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह मिली है। इसे दुनिया की पहली लकड़ी की बिल्डिंग, सबसे ऊंची और आर्किटेक्चर के हिसाब से तीन कैटेगरी में वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया है।

यह 24 मंजिला है। इसमें 150 से ज्यादा कमरे बनाए गए हैं। दो साल में तैयार हुई बिल्डिंग का निर्माण आर्किटेक्ट सुइ हैंग की डिजाइन के आधार पर किया गया है। इसमें देवदार की लकड़ियों का इस्तेमाल किया गया है।इसकी छत और दीवार भी लकड़ी की बनी हैं। यह पूरी तरह से ईकोफ्रेंडली है।

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लकड़ी से बनी बिल्डिंग।


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